Antarvasna-Kamukta

कयामत ढाने वाली कमाल की माल

मैं अपनी नसीब की ठकर Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai से मजबूर एक साला कमीना अभागी लड़का, जो हमेशा लड़कियों और औरतों पर अपनी एक पैनी नज़र रखता है! मौका मिले तो उन्हें कभी नहीं छोड़ता, लेकिन किसी के दिल के साथ मैं नहीं खेलता, और उनके दिल को ठेस नहीं पहुचाता!

ऐसे ही एक बार मैं अपने दोस्त के घर गया! हम दोनों शाम को उसकी छत पर बैठे बाते कर रहे थे! शाम को करीब 6-7 बजे उसके घर के सामने एक लड़की छत पर आयी, उसके आते ही मेरा मुह खुला का खुला रह गया! वो लड़की नहीं, सच में कोई क़यामत थी!. वो करीब 21-22 साल की बहुत ही खूबसूरत नव युवती थी! और उसने उस दिन काला नेकर और गुलाबी टीशर्ट पहन रखी थी!

मैं उसे देखता ही रह गया, फिर मेरे दोस्त ने मुझ से पूछ ही लिया कि, मैं उसे इस तरह क्यूँ देख रहा हूँ? मेरा दोस्त वैसे तो एक नम्बर का कमीना ठरकी था, लेकिन उसके घर के सामने और पड़ोसियों से उसके घर वालो के अच्छे सम्बन्ध थे, शायद इसलिए वो उधर नहीं देख रहा था! मैंने उस लड़की के बारे में अपने ठरकी दोस्त से पुछा, तो उसने बताया कि, वो लड़की गर्मियों की छुट्टियों में अपनी मामी के यहाँ आयी हुई है! मेरा तो जैसे काम बन गया! और अब मैं वहीं पर बैठ गया और उसे निहारने लगा! मैं करीब 8:30 तक वहीं रहा और फिर अपने घर चला गया, लेकिन वो लड़की रह रह कर मुझे सता रही थी!

अगले दिन शाम को मैं फिर अपने दोस्त के घर पहुच गया, और हम दोनों छत पर गप्पे मारने लगे! वो लड़की फिर उसी समय छत पर आयी, आज वो और ज्यादा क़यामत ढा रही थी! वो करीब 5’2″ लम्बी, गोरि, उसकी पतली कमर, लम्बे बाल, गोरी चिकनी टाँगे, गोल आकार के मोटे स्तन और बाहर निकले हुए मोटे कुल्हे उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहे थे!

देखने में वो माल लग रही थी, और उसे देखकर मेरी लार टपक रही थी, मेरी लालसा उसे पाने की हो रही थी! मैं उससे बात करना चाहता था, लेकिन दिल में चोरी, मेरा ठरकीपन मुझे उसके सामने खड़ा करने से रोक रहे थे! जब उसने मेरी और कोई ध्यान नहीं दिया तो, मैंने कुछ इस तरह से इशारा करने की कोशिश की कि, वो मेरी और देखे, लेकिन मेरे इशारे अश्लील नहीं थे! मैं उससे कुछ कहना चाहता था! लेकिन उसे शायद इन सब बातो से कोई फरक नहीं पड़ा! इसी तरह वक़्त बीतता गया और ना जाने वो कब, वापस चली गयी पता ही नहीं चला!

उस नव यूवती को दोस्त की छत से देखना और महीने तक रोज दोस्त के घर जाना फिर उस लड़की को निहारना अच्छा लगता था! बचपन की वो यादे, जिन्हें हम दोस्त के सिवाय किसी और से शेयर नहीं कर सकते!